Holy Scriptures

Wednesday, July 1, 2020

असली ब्राह्मण कौन
                                 

 सही मायने में ब्राह्मण शब्द विद्वान के लिए प्रयुक्त किया जाता है वास्तव में जो भगवान के ज्ञान से परिचित है वही ब्राह्मण कहलाने योग्य है ! आज वर्तमान में एक जाति विशेष ब्राह्मण वर्ग है उसे ही ब्राह्मण कहते हैं जो बिल्कुल गलत है; कबीर साहिब ने ब्राह्मण और पंडित की परिभाषा बड़े ही सरल ढंग  से जनमानस को समझाया है ! ब्राह्मण वही जो ब्रह्म ब्रह्म को जाने अर्थात जो व्यक्ति ब्रह्म (God) भगवान के बारे में कंप्लीट जानकारी रखता है वही वास्तव में ब्राह्मण है, पंडित वही जो पिंड की जाने पिंड का अर्थ इस शरीर से है इसे संत भाषा में पिंड कहते हैं अर्थात जो मानव शरीर के बारे में जानता है,जैसे कि भगवानों का वास मानव शरीर में किस स्थान पर होता है? कितने कमल चक्कर है ? उनके मंत्र क्या है? उनकी सही साधना कैसे की जाती है ? इस मानव शरीर में परमात्मा दिखाई देता है इस तरह की काफी जानकारियां जो जानता है वह वास्तव में पंडित कहलाने योग्य है! पुराने समय में जो व्यक्ति काशी विद्यापीठ शहर से पढ़कर आता था एवं सभी शास्त्रों का जानकार होता था उसे लोग पंडित या ब्राह्मण कहते थे !उसे एक उपाधि दी जाती थी "पंडित" की लेकिन धीरे-धीरे आगे चलकर यही एक परंपरा बन गई आज  उसी  परंपरा  के तहत ब्राह्मण या पंडित कहे जाते हैं जैसे  कोई व्यक्ति अच्छा वैद्य था वह किसी की भी नाडी (नब्ज)पकड़ कर अमुक रोग बता देता था और उसके अनुसार उसे औषधि भी बता कर उसे स्वस्थ कर देता था और वह वैद्य नाम से प्रसिद्ध हो  गया वह अपने पीछे सरनेम वैद्य लगाने लगा इस नाम से उसे आसपास के क्षेत्र में जानते थे उसके वंशज भी उस सरनेम को अपने नाम के पीछे लगाने लगे! लेकिन वास्तव में वैद्य नहीं थे खोल रखी है पर चुने की दुकान जानता नहीं पेट के दर्द की अपने नाम के लिखवा रखा है "फलाना रामवैद्य की दुकान" लगा रखा है उसी प्रसिद्ध  रामनाथ वैद्य के अन्य वंशज ने कपड़े की दुकान खोल रखी है फिर भी अपने नाम के पीछे वैद्य लगा रखा है जबकि वास्तव में वैद्य उसके पिताजी थे उसके पूर्वज थे लेकिन आज भी वह वैद्य के नाम से जाने जाते हैं ठीक इसी प्रकार वर्तमान में जितने भी ब्राह्मण पंडित हैं और जो भगवान की बारे में ए बी सी डी भी नहीं जानते वह ब्राह्मण या पंडित नहीं है वह एक केवल सरनाम लगाए हुए हैं वर्तमान समय में संत रामपाल जी वास्तव में ब्राह्मण और पंडित हैं और उनके अनुयाई जो भगवान के बारे में कंपलीटली जानकारी रखते हैं वेद शास्त्रों के अनुसार भक्ति साधना करते हैं वही वास्तव में पंडित या ब्राह्मण कहलाने योग्य हैं कर्मकांडी ब्राह्मण जो श्राद्ध पित्र पूजा इत्यादि निकालते हैं पिंडदान करवाते हैं  वे वास्तव में नकली ब्राह्मण पंडित हैं

                                 


 क्योंकि उनको शास्त्र का ठीक से ज्ञान ना होने के कारण शास्त्र विरुद्ध साधना स्वयं करते हैं और अपने अनुयायियों से करवाते हैं जिससे उनके अनमोल मानव जीवन नष्ट हो रहा है और बहुत बड़े पाप के भागी हो रहे हैं समझदार जनता को चाहिए कि संत रामपाल जी महाराज के द्वारा दिए गए अनमोल ज्ञान को पहचान कर अपने शास्त्रों से मिलान करके तुरंत नकली धर्मगुरुओं आचार्यों को त्याग कर सच्चे संत की शरण ग्रहण करके अपना मानव जीवन का जो मूल उद्देश्य है भक्ति करना उस पर  दृढ़ता से लग जाए जिससे उनका जीवन  रक्षा भी होगी और भगवान की प्राप्ति भी होगी मोक्ष भी सहज में प्राप्त होगा


                               


 संत रामपाल जी विश्व में एकमात्र ऐसे तत्वदर्शी संत हैं जो सभी शास्त्र अनुकूल भक्ति साधना निशुल्क प्रदान करते हैं जिससे उनको अनुयायियों को अभूतपूर्व अद्वितीय आध्यात्मिक शारीरिक मानसिक दैविक भौतिक आर्थिक सभी प्रकार के लाभ हो रहे हैं cancer AIDS अन्य जानलेवा बीमारी  भी ठीक हो जाती है जब कोई संत रामपाल जी के बताए अनुसार भक्ति करता है मर्यादा में रहकर तो उनके संकट मिट जाते हैं आप सभी से निवेदन है एक बार संत रामपाल जी का ज्ञान जरूर सुनें और समझें अधिक जानकारी के लिए आप साधना टीवी पर 7:30 से 8:30 बजे तक रोजाना शाम को टीवी देखें  और सर्च करें
           www.jagatgururampalji.org

इंटरनेट पर जगतगुरु रामपाल जी महाराज

सत साहेब

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