संघर्ष
इतिहास उन्हें महापुरुषों का लिखा जाता है जिन्होंने कठोर संघर्ष किया होता है ! संघर्ष किए बिना किसी को भी आज तक अपने मुख्य उद्देश की प्राप्ती नहीं हुई ! अलग-अलग महापुरुषों की अलग-अलग क्षेत्र की अपनी अपनी एक विशेष कहानी होती है, हम सब ने बहुत सारे सुप्रसिद्ध व्यक्तियों की संघर्ष की कहानी पड़ी है; जैसे डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम जी भूतपूर्व राष्ट्रपति एवं महान वैज्ञानिक, आदरणीय नानक देवजी सिख धर्म के प्रवर्तक, भक्त शिरोमणि मीराबाई जी और भी बहुत सारे अपने अपने क्षेत्र के महापुरुष हुए हैं,आज इसी कड़ी में एक महान दिव्य महापुरुष की कहानी से आपको रूबरू कराएंगे, जो वर्तमान में एक लीला में तरीके से जारी है,जिसे आने वाले मानव इतिहास में सर्वश्रेष्ठ संघर्ष की कहानियों में जाना और माना जाएगा ! इस संघर्ष से केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि संपूर्ण सृष्टि का भला होगा यह संघर्ष की कहानी है आध्यात्मिक क्षेत्र के दिव्य महापुरुष संत रामपाल जी महाराजकी जी हां, दोस्तों इनकी संघर्ष की कहानी को जब आप जानोगे तो आंखों से अश्रु धारा स्वत ही बह चलेगी, संत रामपाल जी का जीवन 8 सितंबर 1951 से प्रारंभ होता है यह वह दौर था जब भारत में शिक्षा का शुभारंभ हुआ था! शिक्षा ग्रहण करके आगे चलकर सिंचाई विभाग में इंजीनियर पद पर तैनात हुए ! युगों युगों और जन्म जन्मांतरओ के शुभ प्रबल भक्ति संस्कार की बदौलत के कारण आध्यात्मिक मार्ग में विशेष रुझान बना रहा और इसी मार्ग में आगे चलकर फरवरी माह 1988 में स्वामी रामदेवानंद जी कबीरपंथी गुरुजी से दीक्षित हुए और यहीं से शुरू होती है उनकी आध्यात्मिक संघर्ष की कहानी; ज्ञान को समझकर भक्ति मैं विशेस सुरुचि और दृढ़ता के साथ नेम मर्यादा में रहते हुए देखकर भक्ति करने से स्वामी रामदेवानंद गुरु महाराज ने 1994 संत रामपाल जी महाराज को संगत को नाम दान देने का आशीर्वाद और आज्ञा दे दी, गुरुजी के आज्ञा को मानते हुए दिन रात एक करके भक्ति की और संगत में कबीर परमेश्वर के ज्ञान को खुब प्रचार प्रसार किया, कबीर परमेश्वर का ज्ञान जगत की परंपराओं और पाखंड वाद पर कुठाराघात करता है इसीलिए विरोध होना स्वभाविक था, धीरे-धीरे विरोध भी होता गया और संगत भी धीरे-धीरे बढ़ने लगी गांव गांव में घर घर जाकर गरीब दास जी महाराज के *सद ग्रंथ साहिब* का पाठ करना भक्ति की सही विधि बताना और नेम मर्यादा सुदृढ़ करना, जिससे साधकों को विशेष अद्वितीय आध्यात्मिक, शारीरिक, भौतिक, मानसिक,और आर्थिक व अन्य सभी प्रकार के लाभ होने लगे और उनकी संगत बढ़ने लगी अनुयायियों को विशेष हिदायत दी गई कि आपको नियम मर्यादा में रहकर भक्ति करनी होगी तभी लाभ होंगे नियम मर्यादा जगत के लोगों को अच्छी नहीं लगी संत रामपाल जी के द्वारा बताई गई भक्ति विधि शास्त्र अनुकूल एवं प्रमाणित है जबकि समाज में प्रचलित भक्ति विधि शास्त्र विरुद्ध बिना सिर पैर की और शास्त्र विरुद्ध थी जिससे किसी को कोई लाभ होने वाला नहीं है ! संत रामपाल जी ने वेद शास्त्र गीता, बाइबल, कुरान शरीफ, गुरु ग्रंथ साहिब अन्य सभी का प्रमाण देकर बताने लगे लोग आश्चर्यचकित होकर देखकर इस वक्त विधि को अपनाने लगे 2001 बाद एक दयानंद सरस्वती नाम के आर्य समाजी महर्षि के सत्यार्थ प्रकाश को जब गहराई से अध्ययन किया तो पाया कि यह शास्त्रों के बिल्कुल विपरीत है और समाज में बिल्कुल लागू नहीं किया जाता ऐसी गलत और बेखुदी बातें इस सत्य प्रकाश में लिखी हुई थी, लेकिन जनता इन चीजों से अनभिज्ञ थी संत रामपाल जी ने समाचार पत्रों के माध्यम से टीवी, सीडी के माध्यम से, चैनलों के माध्यम से वेदों से तुलना करके सत्यार्थ प्रकाश की पोल खोल दी, यह बात आर्यसमाज को बिल्कुल पसंद नहीं आई क्योंकि वे दयानंद सरस्वती के सत्यार्थ प्रकाश को बेचकर अपना रोटी रोजी चला रहे थे इसीलिए उनको यह बात रास नहीं आई रोहतक हरियाणा का आर्य समाजीयो का प्रमुख गढ़ है, और तत्कालीन मुख्यमंत्री भी आर्य समाजी था जिसका नाम था भूपेंद्र सिंह हुड्डा था, एक विशेष षड्यंत्र के तहत आर्य समाजियो ने जुलाई 2006 में
आस-पास के गांव में मीटिंग और आयोजन करके गलत और बुरी बातें संत रामपाल जी और आश्रम करोंथा में प्रसारित प्रचारित कर दी
जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं था लोगों ने उनके बहकावे में आकर सरकार को अपने पक्ष में कर कर भोली भाली जनता को गुमराह करके हजारों लोगों के साथ घातक हथियार लेकर करोथा आश्रम वह संत रामपाल जी और उसमें सत्संग सुनने आए श्रद्धालुओं के ऊपर धावा बोल दिया आखिर में रिजल्ट यह हुआ करोंथा आश्रम को बंद करवा दिया एवं सत्संग सुनने आए श्रद्धालुओं विशेष रुप से प्रताड़ित एवं यातना देकर सताया गया साथ में झूठे आरोप संत रामपाल जी ऊपर लगाकर जेल भेज दिया गया 22 महीने जेल में रहकर संत रामपाल जी फिर से अपने मिशन को सुचारू रूप से चलाने के लिए बरवाला आश्रम में आ गए उनके प्रचार प्रसार तब तक देश दुनिया में फैल चुका था उनके अचूक और प्रमाणिक ज्ञान को देखकर अज्ञान निद्रा में सोए हुए भक्ति की प्यासी आत्माए तब तक जाग चुकी थी उमड़ घुमड़ कर दूर-दूर से श्रद्धालु संत रामपाल जी की शरण में आने लगे उनके मिशन में अब तक बहुत ज्यादा वृद्धि हो चुकी थी उनका ज्ञान विदेशों में जा चुका था उधर एक तरफ विरोध भी बढ़ता चला गया तब से लेकर वर्तमान तक 2020 तक संत रामपाल जी झूठे केस के मुकदमे चलते वह आ रहे हैं परंतु उनके अनुयाई हजारों लाखों की संख्या में हो चुके थे इस ज्ञान को उनके शिष्य तो इस गांव गांव गली गली शहर शहर हर जन जन तक पहुंचाने लगे अब ज्ञान की इतनी रफ्तार हो चुकी थी जैसे बुलेट ट्रेन हो इस ज्ञान की आंधी और तूफान को रोकना असंभव था 2009 में भारत के शंकरा चारों को आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा के लिए आमंत्रित किया लेकिन वह किसी कारण इस ज्ञान चर्चा में भाग नहीं ले सके परंतु संत रामपाल जी ने उनके ज्ञान को वेद शास्त्रों पुराणों से तुलना करके जनता को रूबरू करा दिया सन 2012 में पूरे विश्व मैं अपना ज्ञान का झंडा गाड़ दिया सभी विश्व के सभी धर्म गुरुओं को आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा के लिए आमंत्रित किया लेकिन सभी नकली धर्मगुरु जान चुके थे कि संत रामपाल जी के ज्ञान के आगे वह पल भर भी नहीं ठहर सकते इसीलिए वह सारे नकली धर्मगुरु सामने ना आकर छुप कर बैठ गए संत रामपाल जी ने उनके ज्ञान की लिखी पुस्तकों और वीडियो सत्संग के द्वारा उनके अज्ञान की खाल उतार कर जनता के सामने प्रस्तुत कर दिया संत रामपाल जी ने पुस्तकों और डीवीडी के माध्यम से टीवी समाचार पत्रों के माध्यम से यह ज्ञान जनता तक पहुंचाया जनता उमड़ घुमड़ कर लाखों की संख्या में सतलोक आश्रम बरवाला
में आने लगे उनके मिशन में अब अभूतपूर्व वृद्धि होने लगी उधर पहले से ही चल रहे झूठे केसों के लिए संत रामपाल जी को कोर्ट में बुलाने के लिए सन 2014 में एक फिर से षड्यंत्र रचा और इस षड्यंत्र में सभी नकली धर्मगुरु राजनीतिक लोगों का सहारा लेकर कामयाब हो गए यह विश्व का वह ऐतिहासिक दिन था जिसकी तुलना महाभारत या रावण राम के युद्ध से की जा सकती है एक तरफ निहत्थे संत रामपाल जी के अनुयाई अपने झूठे केसों की सीबीआई जांच के लिए हाथों में तख्तियां लिए हुए आश्रम के बाहर भीतर शांति पूर्वक बैठकर तत्कालीन सरकार से गुहार कर रहे थे कि हमारे सभी झूठे केसों की सीबीआई जांच हो परंतु सरकार को नकली धर्मगुरु से मिलकर कुछ और ही करना था जहां 1999 में 40000 कमांडो की फोर्स पाकिस्तान की फौज के विरुद्ध लड़ाई लेने के लिए कारगिल युद्ध में भेजी गई ठीक इतनी संख्या में एक निर्दोष संत को कोर्ट में पेश करने के लिए जो कि पहले से ही बीमार चल रहे थे उसका सर्टिफिकेट कोर्ट में जमा कर चुके थे फिर भी जबरदस्ती पूर्वक उनके मिशन को चकनाचूर करने के उद्देश्य जनकल्याण और समाज सुधार के अभूतपूर्व अद्वितीय मिशन को जड़ से खत्म करने के लिए प्रशासन ने सतलोक आश्रम बरवाला
पर धावा बोल दिया जिसमें एक्सपायर आंसू गैस के गोले संख्या से ज्यादा बेशुमार और जहरीली गैस नवंबर की ठिठूर्ती ठण्ड मे केमिकल युक्त आश्रम के बाहर बैठी संगत संगत में छोड़ा गया हजारों की तादात में हथियारबंद पुलिस कर्मियों द्वारा आश्रम के अंदर आंसू गैस के गोले लोहे एवं प्लास्टिक की गोलियां संगत पर अंधाधुंध बेशुमार तरीके से बरसाई गई सैकड़ों की तादात में जे सी बी से चारों तरफ आश्रम को ढाया जा रहा था बाहर से कोई भी सामान आने जाने नहीं दिया जा रहा था लगभग आठ 10 दिन पहले बिजली सप्लाई बंद कर दी बाहर से आने वाला खाद्य सामग्री बंद कर दी दवाई गोलियां जो मरीजों के लिए आती थी वही बंद कर दी में संत रामपाल जी को जेल में भेज दिया गया साथ में उनके उधर आश्रम के अंदर भूख प्यास पानी से बीमारी से तड़प रहेसंत रामपाल जी के अनुयाई बच्चे बूढ़े बुजुर्ग सब तड़प रहे थे हर संभव प्रयास किया सरकार से गुहार लगाई फोन किए ईमेल किए लेकिन कोई सुनवाई नहीं आखिर इस खूनी संघर्ष में निर्दोष छह भाई-बहनों सहित जान गवानी पड़ी और यह केस भी संत रामपाल जी पर मढ़ दिया और हजारों की तादात में भक्तों के ऊपर देशद्रोह जैसे गंभीर कानून धारा लगाकर जेल में डाल दिया गया आखिरकार संत रामपाल जी बीमारी की हालत में देशद्रोही और भी गंभीर आरोप लगाकर जेल में उन्हें भी डाल दिया गया और भक्तों को मारा पीटा गया गया हजारों गयाइतिहास में पहली बार संत जी और उनके अनुयायियों पर ऐसी धाराएं लगाई गई जो किसी पर नहीं लगाई गई इतना बड़ा झूठ का पुलिंदा तैयार किया गया के 5000 पेजों की झूठी रिपोर्ट तत्कालीन सरकार द्वारा कोर्ट में पेश की गई कई हालांकि अब तक कई केसों में बाइज्जत बरी भी हुए हैं अब समाज में संत रामपाल जी के द्वारा दिया गया शास्त्र अनुकूल भक्ति साधना प्रचंड आंधी तूफान की तरह उठ चुकी थी उसे रोकना अब किसी के बस की बात नहीं थी संत रामपाल जी के मिशन को बिल्कुल खत्म करने का उनका उद्देश्य था परंतु वे अ ज्ञानी नकली धर्म गुरु इस बात से अनभिज्ञ थे के यह कबीर परमेश्वर का चलाया हुआ मिशन था जो पहले से ही निर्धारित था जो सफल होकर ही रहेगा दर्जनों विश्व भर के सुप्रसिद्ध भविष्य वक्ताओं ने भी पहले से ही भविष्यवाणी कर रखी थी इस मिशन और इस भक्ति विधि इस महापुरुष के बारे में वॉल था जो सत्य साबित हो रहा था सन 2014 से सन जुलाई 2020 वर्तमान तक संघर्ष जारी है अब इस संघर्ष में चमत्कारिक परिवर्तन आने वाला है संत रामपाल जी एक आम इंसान नहीं है वह साक्षात कबीर परमेश्वर है यह बात जब आप जानोगे ज्ञान के माध्यम से जनोगे तो आप भी आश्चर्यचकित हो रह जाओगे और तुरंत संत रामपाल जी की शरण ग्रहण करके अपना जीवन सफल बना ओगे उनके ज्ञान को समझ कर उन्हें पहचाना और जाना जा सकता है यदि आप भी संत रामपाल जी की शरण ग्रहण करना चाहते हैं उन्हें जानना चाहते हैं तो आज ही संत रामपाल जी का जो सत्संग साधना टीवी पर शाम को 7:30 से 8:30 बजे तक आता है उसे देखना प्रारंभ कीजिए सत साहेब और इंटरनेट पर जगत गुरु संत रामपाल जी सर्च कीजिए
www.jagatgururampalji.org






